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मनीष आशिक़ के पढ़े नज़्में ।

मनीष आशिक़ के पढ़े नज़्में ।

हल्द्वानी।   नज़्म शायर की ज़िन्दगी में रात का अंधकार होता है  चमकने की आरज़ू होती है  जलने की मजबूरी होती है  सिगरेट फूँकते कुछ शब्द होते हैं  जिनमें लिपटे होते हैं ज़ख्म माज़ी (past )के शायर की ज़िन्दगी में  दूर दूर तक बेतरतीबी से बिखरा  सफेद काग़ज़ का ढ़ेर होता है  और होती है एक चुनौती  सफेद काग़ज़ को लगातार इन्द्रधनुष में बदलते रहने की ...  और भी...
 एक नई कविता के साथ " मेरे कन्धे "

एक नई कविता के साथ " मेरे कन्धे "

मेरे कंधे पर बैठा मेरा बेटा जब मेरे कंधे में खड़ा हो गया मुझी से कहने लगा देखो पापा मैं तुमसे बड़ा हो गया मैंने कहाबेटा इस खूबसूरत गलतफहमी में भले ही जकड़े रहना मगर मेरा हाथ पकड़े रखना जिस दिन यह हाथ छूट जाएगा बेटा तेरा रंगीन सपना भी टूट जाएगा । दुनिया वास्तव में उतनी हसीन नहीं है। देख तेरे पांव तले अभी जम नहीं है। मैं तो बाप हूँ बेटा बहुत खुश हो जाऊंगा जिस दिन तू वास्तव में मुझसे बड़ा...  और भी...
सुबह की किरणों के साथ लेकर आये हैं "प्रेम गीत"

सुबह की किरणों के साथ लेकर आये हैं "प्रेम गीत"

चाँदनी घुल रही है तेरे गालों पर सारा आकाश तारों से है भर गया मखमली घास से ओस चुनते हुए रात तू मुस्कुराई तो मैं मर गया तेरे हाथों की मेंहदी की सौधी महक शब्द बनकर मेरे गीतों में रच गयी . मैंने छेड़ा तरन्नुम तेरे हुस्न का मेरी सांसों में धुन बनके तू बस गयी रात काटी है करवट बदलते हुए वो मेरी आँखों में ऐसे रहकर गया तेरे माथे की बिंदिया का सिंदूरी रंग उगते सूरज की तरह चमकता रहे त...  और भी...
मोदी सरकार पर कविता करना भारी पड़ा पूर्व सीएम हरदा को

मोदी सरकार पर कविता करना भारी पड़ा पूर्व सीएम हरदा को

सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने फेसबुक वाल पर तुकबंदी के अंदाज में एक कविता लिखी . कविता से पहले उन्होंने लिखा कि मैं न कवि हूं और न कवि हृदय . विशुद्ध राजनीतिज्ञ हूं.  मगर जिन्होंने पिछले चार वर्षों से नमो नमो के   स्वर को गुंजायमान कर अपना गला फाड़ दिया, उनके लिए मैं चिंतित हूं.  रोजगार के अवसर घट रहे हैं.  अपनी पोस्ट में रावत ने एक तुकबंदी की और घोषणा की कि...  और भी...
फिर किसी की आँखों में प्यार के मोती देखे हैं

फिर किसी की आँखों में प्यार के मोती देखे हैं

फिर किसी की आँखों में प्यार के मोती देखे हैं  फिर किसी ने एक पल में दिल चुराया है मेरा कहने से डरता हूँ मैं ,प्यार जिसे करता हूँ मैं .... उसके बदन की खुशबू ने घर महकाया है मेरा उसे देखते ही कसम मैंने ली है  उसे अपनी जानां बनाकर रहूँगा वो जब घर से निकले तो कदमो तले  मैं सितारों की चादर बिछाकर रहूँगा मैं ये जानता हूँ उसे हर जन्म में  खुदा ने दिलबर बनाया है मेरा ...  और भी...
प्यारा उत्तराखण्ड हमारा -  मनीष "आशिक़ "

प्यारा उत्तराखण्ड हमारा - मनीष "आशिक़ "

पर्वतों के कांधे  पर शाम ठहरती है आकर ...... नदियों की पकड़ कलाई ऋतुएँ   बहती लहराकर ..... ऐसा है न्यारा उत्तराखण्ड हमारा हमको है प्यारा उत्तराखण्ड हमारा कोहरे की चादर ओढ़े हैं  वादियाँ नैंनीताल की..... सितारों से सजी हुई है भूमि बद्री विशाल की गुलों के गाल पर सूरज  लाली भरता  है ओस की बूदों से मौसम का रंग निखरता है कोयल की कु कु से होता है उजियारा सबसे है ...  और भी...
ये आँखें बस तुम्हारे ख्वाब में खोई हुई हैं .-मनीष

ये आँखें बस तुम्हारे ख्वाब में खोई हुई हैं .-मनीष

ये आँखें बस तुम्हारे ख्वाब में खोई हुई हैं .... अभी तुमको जो देखा है तो ये ज़िंदा हुई हैं ..... तुम अपने होंटो से मिरा नाम लेकर ..!! मुझे इतराने पर मजबूर कर दो ...l मेरे गीतों को माथे से लगा लो  इन्हें तुम मांग का सिंदूर कर दो ...l अजब एक प्यास है ,एक उम्र से भरती नहीं है ये आँखें बस तुम्हारे ख्वाब में खोई हुई हैं मैं तुमको अपने मन की बात कह दूँ  तुम मुझको अपने मन का मी...  और भी...
अभी और कितना गिरोगे तुम- कवि मनीष आशिक

अभी और कितना गिरोगे तुम- कवि मनीष आशिक

 अभी और कितना गिरोगे तुम अभी कितना गिरोगे तुम मैं अपने जन्म के पहले से तुमसे डरती आई हूँ आँखों में सपनों की जगह आंसू भरती आई हूँ वो जब  तुमने मुझे धीरे से जांघों पर बिठाया था मिरी कमज़ोर हाथों  को फिर कसकर दबाया था फिर अपने लपलपाते होठों को  मिरे गालों से छुआया था और जब मैं सहमी तो इन सब बातों को नार्मल बताया था जब से जान गयी हूँ  कि वो सब कुछ कितना घिनौना था मु...  और भी...
 मनीष आशिक की एक और नई कविता- मिरी साँसें हैं  महकती

मनीष आशिक की एक और नई कविता- मिरी साँसें हैं महकती

 मिरी साँसें हैं  महकती  सारा  जिस्म खिल गया है कल रात मुझको छत पर  कोई ऐसा मिल गया है लब उसके हैं गुलाबी एआँखों में एक चमक है है मीठी उसकी बातें एआवाज़ में खनक है मिरे दिल की महफिलों में अब उसकी ही धनक है मिरी साँसें हैं  महकती  सारा जिस्म खिल गया है मिरा यार है जूही का कोई फूल इस चमन में उसे देखता हूँ जब मैं कभी दिल के अंजुमन में भर जाती है ख़ुशी तब...  और भी...
 नयी उमंग के साथ  " प्रेम गीत "  लेकर आये है - मनीष पाण्डे

नयी उमंग के साथ " प्रेम गीत " लेकर आये है - मनीष पाण्डे

  तिरे चेहरे की मासूमियत देखकर मिरा दिल तुझपे जानां फिदा हो गया ये असर है तिरे इश्क  का ही सनम तुझको पाया तो खुद से जुदा हो गया तिरी पलकों पे जो ख्वाब पलने लगे फर्ज मिरा है मैं उनको पूरा करूँ .... हर जन्म में रहे रिश्ता हम दोनों का तू मिरी रहे और मैं तिरा रहूँ ..... याद रहता नहीं अब तो खुद का पता तुमसे मिलकर के मैं गुमशुदा हो गया ..... तिरे चेहरे की मासूमियत देखकर मिरा दिल ...  और भी...

आप का कोना