हेल्पलाइन: +91-956 852 4734
  • Breaking News

ताज़ा
खबरे

  • फरियादियों से मिलने का अंदाज एन डी तिवारी जैसा है तीरथ का
  • क्या आप चाहते है स्वस्थ और निरोगी दांत ? तो जानिए डेंटिस्ट डॉ. स्वाती सिंघल की ये सलाह : -
  • आख़िर क्या है वैक्सीन का सफर ? ज्योति आर्या की रिपोर्ट
  • हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र सिंह बिष्ट की सलाह :
  • जवाहरनगर में राष्ट्रीय मशरूम दिवस पर कार्यशाला आयोजित
  • जानिए कोरोना में डॉ गौरव सिंघल की सलाह:

ख़बरें विस्‍तार से

राम रहीम को रेप का दोषी मानते हुए सीबीआई अदालत ने सुनाई 20 साल की सजा

  Publish Date: Aug 29 2017 10:40AM IST
टैग्स:

सीबीआई कोर्ट के जज जगदीप सिंह ने अपने फैसले में गुरमीत पर लगे आरोपों को बेहद गंभीर माना. कोर्ट ने कहा कि दोषी ने अपनी ही अनुयायियों के साथ जंगली जानवर जैसा बर्ताव किया है, इसलिए वो दया का हकदार नहीं है.

     गुरमीत राम रहीम को रेप का दोषी मानते हुए सीबीआई की विशेष अदालत ने 20 साल की सजा सुनाई है. कोर्ट ने अपने फैसले में गुरमीत पर बेहद सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि जो लड़कियां गुरमीत राम रहीम को भगवान की तरह पूजती थीं, उसने उन्हें के साथ घिनौनी हरकत की.

सीबीआई कोर्ट के जज जगदीप सिंह ने अपने फैसले में गुरमीत पर लगे आरोपों को बेहद गंभीर माना. कोर्ट ने कहा कि दोषी ने अपनी ही अनुयायियों के साथ जंगली जानवर जैसा बर्ताव किया है, इसलिए वो दया का हकदार नहीं है.

कोर्ट ने कहा, ’’दोषी ने उन साध्वियों के साथ यौन शोषण किया जो उन्हें पिता की तरह मानती थीं और भगवान की तरह पूजती थीं. ऐसा करके दोषी ने उनका विश्वास तोड़ा है और पीड़ितों का शारीरिक-मानसिक शोषण किया है. पीड़िता गुरमीत राम रहीम के संरक्षण में डेरा में रहती थीं जहां उनके साथ ये हरकत की गई. ऐसे में ये कस्टोडियल रेप से कम नहीं है.

अदालत ने इस केस को रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस माना है. अदालत ने माना, ’’दोषी ने खुद को भगवान के रूप में पेश किया और अपनी ताकत का दुरुपयोग करते हुए मासूम लड़कियों के साथ रेप किया. इसका असर पूरे समाज पर होगा. ऐसे में ये केस रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस की श्रेणी में आता है. जिसके लिए दोषी अधिकतम सजा का हकदार है.’’

 सीबीआई अदालत के जज ने कहा कि एक ऐसे व्यक्ति को नरमी पाने का कोई हक नहीं है जिसे न तो इंसानियत की चिंता है और न ही उसके स्वभाव में दया-करूणा का कोई भाव है. उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक संगठन की अगुवाई कर रहे व्यक्ति की ओर से किए गए ऐसे आपराधिक कृत्य से देश में सदियों से मौजूद पवित्र आध्यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक संस्थाओं की छवि धूमिल होना तय है.

कोर्ट ने ये भी कहा कि दोषी एक असरदार व्यक्ति है. ऐसे में अगर उसे अधिकतम से कम सजा दी गई तो ये राष्ट्र की सामूहिक चेतना को झटका देने जैसा होगा.

दोषी ने कोर्ट में कहा कि उसकी उम्र 50 साल है. वो पिछले 8 साल से हाइपरटेंशन, डाइबिटीज और कमर दर्द की समस्या से पीड़ित है. गुरमीत ने ये भी दलील दी कि वो सामाजिक काम में लगा हुआ है. गुरमीत ने डेरा के सामाजिक कार्यों की एक बुकलेट भी कोर्ट में पेश की. गुरमीत ने कहा कि मैं कानून का पालक हूं, इसलिए मुझे कम से कम सजा दी जाए.

रिपोर्टर

अगली प्रमुख खबरे

आप का कोना