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ग्लोबल लाइव न्यूज़ स्पेशल स्टोरी- मां शैलपुत्री की ऐसे करें पूजा अर्चना, मिलेगा आशीर्वाद--

  Publish Date: Sep 29 2019 9:16AM IST
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ग्लोबल लाइव न्यूज़ डेस्क- स्पेशल  स्टोरी  (रमाकांत पंत )-रविवार से शारदीय नवरात्र का आगाज हो गया है और नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना होती है 9 दिन तक चलने वाले इस शारदीय नवरात्र में प्रत्येक दिन बहुत ही विशेष और महत्वपूर्ण होता है और हर दिन मां भगवती के अलग रूप की विशेष उपासना की जाती है नवरात्र के पहले दिन माता के शैलपुत्री स्वरूप की विधि विधान से इस तरह की जाती है पूजा -

कलश स्थापना-

नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त देखकर कन्या एवं धनु लग्न में कलश स्थापना की जाती है। कलश स्थापना के साथ ही भक्तों मां दुर्गा की आराधना में लीन हो जाते हैं और कलश स्थापना के बाद अन्य देवी देवताओं के साथ ही मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाती है।

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इस रूप में भी होती है मां शैलपुत्री की पूजा-


धर्म शास्त्रों के अनुसार मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री कहा जाता है और माता को  वर्षारूढा और उमा नाम से भी जाना जाता है, यह भी कहा जाता है कि देवी सती जब पुनर्जन्म पर अवतरित हुई तो इसी रूप में प्रकट हुई इसीलिए देवी के पहले शुरू के तौर पर शैलपुत्री की आराधना होती है । मां शैलपुत्री की उत्पत्ति शैल से हुई है। और मां दाएं हाथ में त्रिशूल धारण करती है और उनके बाएं हाथ में कमल का फूल शोभायमान होता है। उन्हें माता सती के रूप में भी पूजते हैं।


कैसे करें माता शैलपुत्री को प्रसन्न-

नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना कर उसे प्रसन्न करने वाले की हर मनोकामना पूरी होती है मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना में सभी नदियों तीर्थों और दिशाओं का विशेष आह्वान किया जाता है इसके अलावा नवरात्र के पहले दिन से आखिरी दिन तक सुबह-शाम घर में कपूर जलाने से नकारात्मक ऊर्जा भी दूर होती है मां शैलपुत्री का ध्यान और मंत्र इस प्रकार है---

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्द्वकृत शेखराम।

वृषारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम॥

मंत्र
ओम् शं शैलपुत्री देव्यै: नम:।

सफेद मिठाई से लगाए मां शैलपुत्री को भोग-

मां शैलपुत्री को सफेद वस्तुएं बहुत प्रिय हैं इसलिए नवरात्रि के पहले दिन मां को सफेद वस्त्र और सफेद फूल चढ़ाते हुए सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाना चाहिए। धर्म शास्त्रों के अनुसार मां शैलपुत्री की आराधना से मनोवांछित फल और कन्याओं को उत्तम वर की प्राप्ति होती है। यही नहीं मां के इस पहले स्वरूप को जीवन में स्थिरता दृढ़ता का प्रतीक माना जाता है शैल का अर्थ होता है पत्थर, पत्थर यानी दृढ़ता का प्रतीक। खासकर महिलाओं को मां शैलपुत्री की पूजा से विशेष फल की प्राप्ति भी होती है।

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