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अपनी पढ़ाई पूरी करने को गरीब किसान की बेटी ने मुफलिसी के दिनों में भी हार नहीं मानी, आज माता-पिता और गांव वालों को है बेटी पर नाज-

  Publish Date: Nov 3 2019 8:05PM IST

Positive News Tyuni -त्यूणी (जौनसार)- "कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो" यह कहावत गरीब किसान माता-पिता की बेटी लीला चौहान पर सटीक बैठती है, क्योंकि लीला चौहान ने विपरीत परिस्थितियों में वह कर दिखाया जो ग्रामीण सुदूरवर्ती आंचल में रहने वाले केवल सपने में सोच सकता हैं अपनी पढ़ाई और शिक्षा के लिए ऐसा संघर्ष शायद ही किसी ने किया हो इसी मेहनत के बदौलत आज उनको वह मुकाम हासिल हो गया जिसका लीला चौहान ने बचपन में सपना देखा था।

 

चकराता ब्लॉक के बोंदुर खत के चामा गांव की रहने वाली है लीला चौहान-

जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर के चकराता ब्लॉक के सुदूरवर्ती बोंदुर खत क्षेत्र के चामा गांव के निवासी गरीब किसान सूरत सिंह के घर पैदा हुई लीला चौहान ने बचपन से ही अपनी पढ़ाई को जारी रखने के लिए कई उतार-चढ़ाव देखे। लीला चौहान के पिता सूरत सिंह और माता नको देवी गांव में खेती-बाड़ी कर किसी तरह परिवार का गुजारा चलाते हैं। परिवार में सात भाई-बहनों में लीला चौहान तीसरे नंबर की है जिन्होंने मुफलिसी के दिन काट कर अपनी पढ़ाई पूरी की।


उत्तराखंड काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के युवा साइंटिस्ट का खिताब लीला चौहान के नाम-

लीला ने कक्षा 5 तक की पढ़ाई समता स्कूल डामटा से की। बचपन से ही पढ़ाई में होनहार रही लीला का छठी क्लास में राजकीय नवोदय विद्यालय के लिए चयन हुआ। तंगहाली के कारण लीला को पढ़ाई करने में कठिनाई हुई लेकिन हमेशा अच्छे नंबरों से पास होने वाली लीला को उनकी मेहनत के बदौलत हायर एजुकेशन के लिए स्कॉलरशिप मिली। लीला चौहान ने पंतनगर से एग्रीकल्चर से बीटेक किया, इसके बाद आईआईटी खड़कपुर से एमटेक की पढ़ाई पूरी की। अपने पीएचडी कर इंजीनियर बनने का सपना देख रही लीला ने अब अपनी पढ़ाई पूरी करते हुए पीएचडी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर ली है। होनहार छात्रों में एक लीला चौहान को 2018 -19 में पीएचडी के दौरान ट्रेनिंग के लिए विदेश दौरे में फ्रांस भी भेजा गया।  यही नहीं जौनसार बावर कि प्रतिभावान बेटी ने तीन बार नेट क्वालीफाई किया है। और हाल ही में लीला को उत्तराखंड काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने युवा साइंटिस्ट के खिताब से नवाजा है। क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने लीला चौहान के इस संघर्ष के बाद शिक्षा क्षेत्र में सफलता हासिल करने पर कहा कि लीला चौहान ने न सिर्फ जौनसार का नाम रोशन किया है। बल्कि यह पहाड़ के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र के बेटियों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बन गयी हैं।

 

चीड़ की पत्तियों पर भी किया है लीला चौहान ने शोध- 

गर्मी के दिनों में बड़ी संख्या में वन संपदा के जल जाने की समस्या पूरे पहाड़ में बेहद गंभीर है जिस पर पीएचडी के दौरान लीला चौहान ने चीड़ के जंगलों में लगने वाली आग को अपना शोध का विषय बनाते हुए चीड़ की पत्तियों से बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग मैटेरियल डिवेलप किया और उस मैट्रियल की मैकेनिकल और फिजिकल प्रॉपर्टीज के तहत उसे उपयोग में लाने का फार्मूला भी तैयार किया है। शिक्षा के क्षेत्र में अपना सपना पूरा कर चुकी गरीब परिवार की बेटी लीला चौहान अब सरकारी नौकरी के साथ-साथ महिलाओं के सामाजिक उत्थान में कार्य करना चाहती है।

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