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रोजमर्रा और व्यस्त भरी जिंन्दगी का कुछ भी भरोसा नहीं

  Publish Date: May 31 2017 12:01PM IST
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 हेल्थ इंश्योरेंस से मिलता है कम उम्र में प्रीमियम का ज्यादा फायदा

रात दिन के रोजमर्रा और व्यस्त से भरी आज की जिंदगी में कुछ भी चीज तय नहीं है।  लेकिन इस  उबर-खाबड़ लाइफ-स्टावइल ने जीवन को खतरनाक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। तभी तो कम उम्र के युवा भी आज कैंसर, दिल, सांस की समस्याओं, ट्यूमर, पैरेलिसिस जैसी बीमारियों के शिकार होने लगे हैं।  जो पहले सिर्फ उम्रदराज लोगों को ही हुआ करती थीं। ऐसे में युवाओं के लिए हेल्थ  इंश्योररेंस की जरूरत को समझना कठिन नहीं रह गया है। इलाज के बढ़ते खर्च के बीच यह स्वाथस्य् आ  ही नहीं, जेब की भी सुरक्षा करता है।

कम देना पड़ता है प्रीमियम
हेल्थन इंश्योरेंस का पूरा गणित संभावनाओं पर निर्भर है। अगर आपकी  उम्र अधिक हो जाती है तो मान लिया जाता है कि आपको बीमारियां होने की संभावना अधिक है। ऐसे में अगर आप कम उम्र में पॉलिसी लेते हैं तो प्रीमियम के रूप में आपको बहुत थोड़ी रकम ही देनी होती है। जबकि उम्र बढ़ने से प्रीमियम की यह रकम बढ़ती चली जाती है, जिससे कारण बाद में अधिकांश लोग इसे वहन नहीं कर पाते हैं।

फाइनेंशियल प्ला निंग मामलों के एक्स पर्ट जीतेंद्र सोलंकी ने बताया कि 25 साल का कोई लड़का अगर 3 साल के लिए 3 लाख का हेल्थ‍ हंश्योंरेंस लेता है तो उसे लगभग 3000 रुपए प्रीमियम चुकाना होगा। पांच साल के ब्रैकेट के बाद भी उसमें थोड़ी तब्दीहली ही आएगी। जबकि अगर वही इंश्योपरेंस कोई 40 साल का व्यैक्ति ले तो उसके लिए उसे 15 हजार रुपए तक का प्रीमियम चुकाना पड़ सकता है।

इम्प लॉयर का कवर नहीं होता है पर्याप्ति
इम्प लॉयर यानी नियोक्ता का कवर अक्सहर पर्याप्तक नहीं होता है। इसे आप किसी हॉस्पिटल के बिल से कंपनी के कवर की तुलना करने पर आसानी से समझ सकते हैं, क्योंककि इलाज का खर्च लगातार तेजी से बढ़ता जा रहा है। ऐसे इम्पझलॉयर द्वारा दिए गए ग्रुप इंश्योंरेंस पर पूरी तरह से निर्भर रहना समझदारी नहीं है।

वेटिंग पीरिएड की नहीं रहती है टेंशन
अक्संर हेल्थं इंश्योऐरेंस पॉलिसी के तहत 30 दिन का वेटिंग पीरिएड होता है।  कुछ मामलों में यह 90 दिन भी होता है। इस दौरान आपातकालीन स्थिति में भी आप कोई क्लेम नहीं ले सकते हैं। ऐसे में अगर आप करियर की शुरुआत में ही बीमा कवर ले लेते हैं तो यह आपके लिए सुरक्षा कवच बन जाता है।  क्योंकि स्वालस्य् आ  समस्या कभी भी आ सकती है।

कम उम्र में अधिक मिलता है कवर
कम उम्र में आपको मैटरनिटी बेनिफिट्स, डेंटल बेनिफिट्स, पहले से रही बीमारियों के साथ काफी अधिक कवर मिल जाता है, जो बाद में या फिर कंपनियों के ग्रुप इंश्यो रेंस में अक्सोर नहीं होता है।

 

रिपोर्टर

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